September 20, 2026
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Dhurandhar: The Revenge

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मुख्य कलाकार

किरदार कलाकार
हमज़ा अली मज़ारी / जसकीरत सिंह रंगी रणवीर सिंह
मेजर इक़बाल (ISI) अर्जुन रामपाल
SSP चौधरी असलम (सिंध पुलिस) संजय दत्त
अजय सान्याल (IB डायरेक्टर) आर. माधवन
यालिना जमाली (हमज़ा की पत्नी) सारा अर्जुन
जमील जमाली (यालिना के पिता) राकेश बेदी
मोहम्मद आलम (हमज़ा का हैंडलर) गौरव गेरा
सुशांत बंसल (डिप्टी डायरेक्टर, IB) मानव गोहिल
उज़ैर बलोच दानिश पंडोर

सहायक किरदार

  • दानिश इक़बाल — दाऊद इब्राहिम / “बड़े साहब”
  • राज ज़ुत्शी — लेफ्टिनेंट जनरल शमशाद हसन (ISI प्रमुख)
  • आदित्य उप्पल — ASP उमर हैदर
  • उदयबीर संधू — गुरबाज़ “पिंडा” सिंह
  • बिमल ओबेरॉय — शिरानी (BUF लीडर)
  • सुविंदर विक्की — ब्रिगेडियर जहाँगीर (इक़बाल के पिता)
  • सौम्या टंडन — उल्फ़त (रहमान की विधवा)
  • भाषा सुंबली — वकील वीना
  • मधुरजीत सरघी — प्रबनीत कौर रंगी (जसकीरत की माँ)
  • परी पंढेर — जसलीन कौर रंगी
  • हितिका बाली — हरलीन कौर रंगी
  • उमर नवीद निर्बान — ज़ायन (हमज़ा का बेटा)
  • आशीष दुग्गल — MLA सुखविंदर सिंह
  • अश्विन धर — अरशद पप्पू (पठान गैंग लीडर)
  • अभय अरोड़ा — यासिर अराफ़ात
  • सलीम सिद्दीक़ी — आतिफ़ अहमद
  • राम चंदर — अशफ़ाक़ अहमद
  • अंकित सागर — जावेद खनानी
  • विनोद थरानी — आज़म चीमा
  • फ़ैज़ ख़ान — साजिद मीर
  • संजय मेहता — अब्दुल भुट्टवी
  • राजेश डोगरा — अब्दुल रहमान मक्की
  • विजेंदर सिंह — अमरजीत सिंह
  • विवेक सिन्हा — ज़हूर मिस्त्री
  • अमनदीप सिंह — सुनप्रीत सिंह “सनी डीवीडी”
  • मुस्तफ़ा अहमद — रिज़वान शाह
  • नेहा पवार — ब्लैक साइट एजेंट / केमिस्ट्री टीचर
  • मशहूर अमरोही — नवाब शफ़ीक़
  • संजय मेहंदीरत्ता — अक़ीब अली ज़रवारी (पाकिस्तान के राष्ट्रपति)
  • हिमांशु गोखानी — DGP संजय कुमार (UP पुलिस)

कैमियो / आर्काइवल

  • अक्षय खन्ना — रहमान डकैत (आर्काइवल फ़ुटेज, पहले भाग से)
  • यामी गौतम — शाज़िया बानो (कैमियो)

इनमें से रणवीर सिंह, अर्जुन रामपाल, संजय दत्त, आर. माधवन और दानिश पंडोर ने पहले भाग वाले अपने किरदार ही दोहराए हैं।

Dhurandhar: The Revenge (2026) — पूरी कहानी

यह अदिति… माफ़ कीजिए, आदित्य धर की लिखी और निर्देशित 2026 की हिंदी स्पाई एक्शन-थ्रिलर है, जो 2025 की Dhurandhar की सीधी सीक्वल और इस ड्यूओलॉजी का आख़िरी हिस्सा है। 19 मार्च 2026 को गुड़ी पड़वा, उगादी और ईद के मौक़े पर रिलीज़ हुई, और 229 मिनट के साथ यह भारत की सबसे लंबी फ़िल्मों में से एक है।

कहानी

2000 में जसकीरत सिंह रंगी पठानकोट से मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए निकलता है। पीछे ज़मीन के विवाद में MLA सुखविंदर सिंह के लोग उसके परिवार पर टूट पड़ते हैं — पिता की हत्या, बड़ी बहन के साथ दरिंदगी और हत्या, छोटी बहन जसलीन का अपहरण। लौटकर जसकीरत अपने दोस्त गुरबाज़ के साथ पूरे गिरोह का सफ़ाया करता है, जसलीन को बचाता है, और फिर गिरफ़्तार होकर फाँसी की सज़ा पाता है।

2002 में जेल ट्रांसफ़र के दौरान उसे इंटेलिजेंस अफ़सर अजय सान्याल और सुशांत बंसल के सामने लाया जाता है। 2004 तक उसे “हमज़ा अली मज़ारी” की नई पहचान देकर काबुल के रास्ते कराची के लयारी में उतार दिया जाता है।

2009 तक हमज़ा बलोच और पठान गिरोहों को आपस में भिड़ाकर लयारी पर पकड़ बना लेता है और “बड़े साहब” (दाऊद) के भीतरी घेरे तक पहुँच जाता है। इसी दौरान पंजाबी विद्रोहियों के साथ गुरबाज़ भी आ जाता है — नशे में वह हमज़ा की असलियत खोलने की धमकी देता है, और मजबूरन हमज़ा को उसे मारना पड़ता है। उसी रात पत्नी यालिना भी सच जान जाती है, पर बेटे ज़ायन की ख़ातिर चुप रहने का फ़ैसला करती है।

शक बढ़ने पर SP चौधरी असलम जाँच शुरू करता है, पर हमज़ा BUF के ज़रिए उसे मरवा देता है। दुबई की गुप्त मीटिंग में सान्याल उसे पूरी छूट देता है, और “ऑपरेशन ग्रीन लीफ़” के तहत नकली करेंसी नेटवर्क चलाने वाले जावेद खनानी और IC-814 हाइजैकर ज़हूर मिस्त्री जैसे मोहरे एक-एक कर ख़त्म होते हैं। उधर असलम का साथी उमर, यालिना और ज़ायन को बंधक बनाकर हमज़ा की असलियत मेजर इक़बाल तक पहुँचा देता है।

क्लाइमैक्स में हमज़ा मुरीदके के मदरसे में हथियार पहुँचाने जाता है; इक़बाल उसे पहचानकर चाकू घोंप देता है, पर हथियारों के बक्सों में छिपा बम फट जाता है। भीषण मुठभेड़ के बाद हमज़ा इक़बाल को शिपिंग यार्ड तक खदेड़कर केरोसिन टैंकर विस्फोट में मार डालता है। पकड़े जाने पर सान्याल ISI चीफ़ को ब्लैकमेल कर उसे छुड़वाता है। अंत में ससुर जमील जमाली ख़ुद को पुराना भारतीय एसेट बताता है — वही दाऊद को धीरे-धीरे ज़हर दे रहा था। मिशन पूरा कर हमज़ा, यालिना और बेटे को पीछे छोड़, जसकीरत बनकर भारत लौटता है और डीब्रीफ़िंग से पहले ही ग़ायब होकर अपने बचपन के घर को दूर से निहारता है।

मिड-क्रेडिट में R&AW ट्रेनिंग की फ़्लैशबैक और पोस्ट-क्रेडिट में उमर को पागलख़ाने भेजे जाने का सीन है।

बेस्ट सीन

मेरी राय में क्लाइमैक्स का मुरीदके मदरसा ब्लास्ट से लेकर शिपिंग यार्ड तक का इक़बाल-हमज़ा टकराव फ़िल्म का सबसे दमदार हिस्सा है — पहचान खुलना, चाकू, RPG और टैंकर धमाका, सब एक साथ। इमोशनल तौर पर गुरबाज़ वाला सीन सबसे भारी है: दोस्त को अपने ही हाथों मारना।

दर्शकों के बीच सबसे वायरल हुआ जमील जमाली (राकेश बेदी) का डायलॉग “मेरा बच्चा है तू”, जिस पर दिल्ली पुलिस, हल्दीराम और वाई-वाई जैसे ब्रांड्स ने तक कैंपेन बना डाले।

एक बात नोट करने लायक़: फ़िल्म को मिले-जुले रिव्यू मिले — परफ़ॉर्मेंस और तकनीकी पक्ष की तारीफ़, पर हिंसा और कथित राष्ट्रवादी प्रोपगैंडा की आलोचना — यानी कहानी असल घटनाओं से प्रेरित ज़रूर है, इतिहास नहीं।

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