6 महीने तक के शिशुओं के फूड में चीनी पर FSSAI का प्रस्ताव: माता-पिता क्या जानें?

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FSSAI ने छह महीने तक के शिशुओं के लिए बने उत्पादों में sucrose और fructose जोड़ने पर रोक का मसौदा प्रस्तावित किया है। जानिए इसका अर्थ और माता-पिता के लिए जरूरी बातें।

शिशु को दूध पिलाते हुए देखभाल का दृश्य

अपडेट: 25 अक्टूबर 2026 — भारत के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने छह महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में sucrose और fructose यानी कुछ प्रकार की शर्करा जोड़ने पर रोक लगाने का मसौदा संशोधन प्रस्तावित किया है। यह मसौदा 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित किया गया था और संबंधित पक्षों से सुझाव व आपत्तियां मांगी गई हैं। इसलिए इसे अंतिम लागू नियम न समझें; अंतिम निर्णय पर आधिकारिक अधिसूचना देखना जरूरी होगा।

FSSAI के प्रस्ताव में क्या कहा गया है?

सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रस्ताव का उद्देश्य छह महीने तक के शिशुओं के लिए बने उत्पादों में अनावश्यक रूप से sucrose और fructose जोड़ने को सीमित करना है। वर्तमान नियमों में शिशु पोषण उत्पादों की संरचना, गुणवत्ता और सुरक्षा के मानक पहले से मौजूद हैं। नया मसौदा इस आयु समूह के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रस्तावित करता है। प्रस्ताव पर सार्वजनिक परामर्श के बाद ही अंतिम नियम तय होंगे।

जीवन के पहले छह महीने का पोषण क्यों अहम है?

पहले छह महीने शिशु की वृद्धि और विकास का महत्वपूर्ण समय हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वास्थ्य संस्थाएं सामान्यतः जीवन के पहले छह महीनों में केवल स्तनपान की सलाह देती हैं, जब तक कोई चिकित्सकीय कारण या विशेष परिस्थिति अलग योजना की मांग न करे। स्तनपान संभव न हो या चिकित्सकीय सलाह से विकल्प जरूरी हो, तो शिशु के लिए उपयुक्त फॉर्मूला और उसे तैयार करने की विधि बाल रोग विशेषज्ञ या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी से समझें।

क्या माता-पिता को फॉर्मूला दूध बदल देना चाहिए?

केवल मसौदा खबर पढ़कर बच्चे का मौजूदा आहार अचानक न बदलें। यदि बच्चा शिशु फॉर्मूला ले रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें, खासकर यदि समय से पहले जन्म, एलर्जी, वजन न बढ़ना या कोई अन्य चिकित्सकीय स्थिति हो। फॉर्मूला की मात्रा बदलना, उसे पतला या गाढ़ा बनाना, या घर पर अलग मिश्रण तैयार करना सुरक्षित नहीं है। पैकेट पर दिए निर्देशों का पालन करें और साफ-सफाई का ध्यान रखें।

शिशु को सुरक्षित भोजन देने के जरूरी नियम

  • छह महीने तक स्तनपान को प्राथमिकता दें, जब तक चिकित्सकीय कारण से अलग सलाह न हो।
  • बच्चे को शहद, मीठा पानी या घरेलू मिश्रण देकर दूध का विकल्प न बनाएं।
  • फॉर्मूला दूध को पैकेट पर दिए निर्देशों और सुरक्षित पानी के साथ तैयार करें।
  • बोतल, निप्पल और तैयारी की जगह साफ रखें।
  • बच्चे का वजन, पेशाब और फीडिंग में बदलाव पर ध्यान दें; चिंता हो तो बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

मसौदा और अंतिम नियम में क्या अंतर है?

मसौदा नियम सरकार या नियामक द्वारा सुझाव प्राप्त करने के लिए जारी किया जाता है। इस चरण में शब्दावली, समय-सीमा या कुछ प्रावधान अंतिम अधिसूचना से पहले बदल सकते हैं। खाद्य निर्माता और उपभोक्ता दोनों को अंतिम नियमों के लिए FSSAI की आधिकारिक अधिसूचना देखनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या यह प्रतिबंध पहले से लागू हो गया है?

25 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी इसे मसौदा संशोधन बताती है। अंतिम अधिसूचना की स्थिति FSSAI से जांचें।

क्या छह महीने से छोटे बच्चे को अलग से चीनी देनी चाहिए?

नहीं। शिशु को अलग से चीनी या मीठे पेय देने की सलाह नहीं दी जाती। फीडिंग से जुड़ी चिंता के लिए बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

स्रोत: Press Information Bureau – FSSAI का मसौदा प्रस्ताव; FSSAI – आधिकारिक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन.

डिस्क्लेमर: यह सामान्य जानकारी है। शिशु के आहार, फॉर्मूला या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर करें।

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