Heart Attack vs Stroke vs Cardiac Arrest
Heart Attack vs Stroke vs Cardiac Arrest: हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट में क्या अंतर है? शरीर का कौन सा अंग सबसे पहले खतरे का संकेत देता है
Nana Patekar Death Cause: Heart Attack vs Stroke vs Cardiac Arrest: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का कार्डिएक अरेस्ट से निधन हो गया. हार्ट अटैक तो आप अक्सर सुनते होंगे लेकिन कार्डिएक अरेस्ट पर कभी-कभी ही सुना जाता है. ऐसे में हमने फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रिंसपल डायरेक्टर डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी से जानना चाहा कि आखिर कार्डिएक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर क्या होता है. इसी के साथ एक और टर्म आता है स्ट्रोक. स्ट्रोक भी इसी से जुड़ा हुआ है. तो आइए जानते हैं कि कार्डिएक अरेस्ट, हार्ट अटैक और स्ट्रोक में क्या अंतर है.

डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी बताते हैं कि हार्ट अटैक, कार्डिएक अरेस्ट और ब्रेन स्ट्रोक के बीच अंतर को समझने के लिए सबसे पहले यह समझिए कि हार्ट कैसे काम करता है. हमारे शरीर में पोषक तत्व, हार्मोन, जरूरी रसायन और ऑक्सीजन को प्रत्येक कोशिकाओं तक पहुंचाने का माध्यम बनता है खून. शरीर में 4 से 5 लीटर तक खून होता है. यह खून पूरे शरीर के कतरे-कतरे तक एक निश्चित रास्ते में चलता रहता है. इसे ही सर्कुलेटरी सिस्टम कहा जाता है. इस खून को इन रास्तों में यात्रा करने के लिए अगर सभी रक्त वाहिकाओं जैसे धमनियों, शिराओं और केशिकाओं को एक के बाद एक जोड़कर बिछाया जाए, तो कुल लंबाई लगभग 96,000 से 1,00,000 किलोमीटर होती है.
इस सर्कुलेटरी सिस्टम के माध्यम से शरीर के सभी हिस्सों से अशुद्ध खून हार्ट में आता है और हार्ट इस खून को लंग्स में भेजकर ऑक्सीजन प्राप्त कर शरीर की सभी कोशिकाओं में पहुंचाता है. इस तरह हार्ट एक पंपिंग मशीन की तरह काम करता है. यह बिना रुके अनवरता धड़कता रहता है. हार्ट में चार चैंबर बने होते हैं. पूरे शरीर से अशुद्ध खून सुपीरियर और इन्फीरियर वेना कावा नामक दो मुख्य शिराओं के माध्यम से दाएं तरफ के चैंबर में पहुंचता है. हार्ट इसे पंप कर पल्मोनरी आर्टरी के माध्यम से लंग्स में पहुंचा देता है. लंग्स में यह खून ऑक्सीजन ग्रहण करता है और कार्बनडाइऑक्साइड को छोड़ देता है. इसके बाद यह खून शुद्ध होकर पल्मोनरी वेन्स के माध्यम से हार्ट के बाएं चैंबर में पहुंचता है. यहां से हार्ट जब पंप करता है तो यह शुद्ध खून धमनियों के माध्यम से पूरे शरीर में पहुंच जाता है.

डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी बताते हैं कि हार्ट की सामान्य प्रक्रिया में जब बाधा पहुंचती है तो हार्ट से संबंधित कई तरह की बीमारियां या जटिलताएं हो सकती है. लेकिन अगर किसी कारणवश धमनियों में ब्लॉकेज हो गया या धमनियां फट गई तो खून हार्ट तक कम पहुंचेगा या पहुंचेगा ही नहीं. यदि इस तरह की स्थिति होगी तो हार्ट को पंप करने के लिए खून मिलेगा ही नहीं. खून नहीं मिलने से हार्ट की मांसपेशियों में खून का प्रवाह बाधित हो जाता है. इससे हार्ट की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते जिससे गंभीर हाइपोक्सिया की स्थिति आ जाती है. यही हार्ट अटैक है. अगर तत्काल खून का प्रवाह बहाल नहीं होता है तो हार्ट की कोशिकाएं तेजी से मरने लगती है. इस कारण हार्ट की पंपिंग क्षमता पूरी तरह से बंद हो जाती है.
अब समझिए कि कार्डिएक अरेस्ट क्या है. डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी बताते हैं कि कार्डिएक दिल के बंद होने की आखिरी स्थिति है. दरअसल, हार्ट में खून को पंप करने के लिए हार्ट के उपरी चैंबर और निचले चैंबर में कुदरती पेसमेकर लगे हैं. ये बहुत कम झटके वाला इलेक्ट्रिक करंट पास करता है जिससे चैंबर पूरी तरह सिकुड़ जाता है. जैसे चैंबर सिकुड़ता है खून पूरी तरह से नलियों में चला जाता है. जब दूसरा झटका लगता है तो यह चैंबर फैल जाता है जिससे शरीर का अशुद्ध खून हार्ट में आ जाता है. जब हार्ट अटैक बहुत गंभीर होता है और कुछ मेडिकल इंटरवेंशन नहीं होता है तब इसी इलेक्ट्रिकल पेसमेकर में गड़बड़ी हो जाती है जिसकी वजह से हार्ट में स्पंदन नहीं होता है. इस कारण हार्ट पूरी तरह से सिकुड़ना और फैलना बंद कर देता है.

कार्डिएक अरेस्ट में कुछ ही मिनट के अंदर मेडिकल इंटरवेंशन की जरूरत होती है. यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत इमरजेंसी सहायता के लिए कॉल करना चाहिए. जब तक मेडिकल टीम न पहुंच जाए, तब तक मरीज के जीवित रहने की संभावना बढ़ाने के लिए तुरंत सीपीआर शुरू करना चाहिए. अस्पताल में, कई तरह की जांच (टेस्ट) की जाएंगी, जिनके निष्कर्षों के आधार पर मेडिकल टीम जटिलताओं के जोखिम को कम करने के लिए एंजियोग्राफी करेंगे. कार्डियोलॉजिस्ट की कड़ी निगरानी में
ब्रेन स्ट्रोक दो तरह के होते हैं. अगर ब्रेन स्ट्रोक इश्चेमिक है तो यह हार्ट से जुड़ा हुआ है. अगर ब्रेन स्ट्रोक हेमरेजिक है तो यह ब्रेन में खून पहुंचने वाली नली के फटने से संबंधित है. इश्चेमिक ब्रेन स्ट्रोक में जब हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट आता है तो खून हार्ट से पंप नहीं होता है. इस कारण ब्रेन में खून नहीं पहुचता है. ब्रेन में खून नहीं पहुंचने से ब्रेन में ऑक्सीजन नहीं पहुंचेगी और इस कारण ब्रेन की कोशिकाएं मरने लगेगी. ब्रेन की कोशिकाएं एक बार यदि मर जाए तो फिर दोबारा वापस जिंदा नहीं होती है या ब्रेन में नई कोशिकाएं नहीं बनती. स्ट्रोक के लक्षणों में शरीर के एक हिस्से, विशेषकर चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी महसूस होना शामिल हो सकता है. अन्य लक्षणों में भ्रम की स्थिति यानी कंफ्यूजन, बोलने में कठिनाई, अचानक चक्कर आना और शरीर का संतुलन बनाने में समस्या शामिल हो सकती है.